जालंधर/गोहाना (आरती ) : 1 अप्रैल से हरियाणा में सरसों और गेहूं की फसल की खरीद शुरू हो रही है, लेकिन अभी तक गेहूं की जगह पर सरसों की आवक तेज चल रही है। अनाज मंडियों में 1 अप्रैल से 5 अप्रैल तक प्रदेश भर में सरकार की सीधे सरसों की खरीद के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन हो रहा है। किसान सरसों को बेचने के लिए अपने ट्रैक्टर में लेकर इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरकारी एजेंसियाँ किसानों को नमी और साफ-सफाई की बहाने वापस भेज रही हैं।
किसानों का कहना है कि उन्हें फसल में नमी होने का दावा किया जा रहा है, जबकि उनका सरसों पूरी तरह से साफ है। वे सुबह से ही मंडी में लाइन में लगे हुए हैं, मगर अभी तक सरसों नहीं बिक रही है। किसान सरसों को समर्थन मूल्य से ऊपर बेचने की अपील कर रहे हैं ताकि उन्हें आढ़ती का टैक्स देने में कोई परेशानी न हो।
दूसरी ओर, अनाज मंडी के प्रधान विनोद सहरावत ने कहा कि सरकार किसानों को परेशान कर रही है। किसान तीन दिनों से मंडी में लाइन में लगे हैं, मगर सरकार सरसों की खरीद नहीं कर रही है। उनके पास साफ-सफाई के लिए यंत्र नहीं है और न ही बरसात से बचने के लिए तिरपाल।


















