आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26: विकसित भारत की ओर बढ़ता कदम, जानें जीडीपी और महंगाई के नए आंकड़े
नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश किया। यह दस्तावेज़ 1 फरवरी को पेश होने वाले देश के पहले ‘रविवार बजट’ की आधारशिला रखता है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन के मार्गदर्शन में तैयार यह सर्वे भारतीय अर्थव्यवस्था को “मजबूत और लचीला” करार देता है।
जीडीपी ग्रोथ (GDP Growth) का अनुमान
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
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वित्त वर्ष 2025-26: वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4% रहने का अनुमान है।
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वित्त वर्ष 2026-27: विकास दर का अनुमान 6.8% से 7.2% के बीच रखा गया है। सर्वे में कहा गया है कि घरेलू मांग और निवेश में बढ़ोतरी की वजह से वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की स्थिति बेहतर है।
महंगाई पर बड़ी राहत
आम आदमी के लिए सबसे अच्छी खबर महंगाई के मोर्चे पर है। सर्वे के मुताबिक:
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अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच खुदरा महंगाई दर (CPI) औसतन 1.7% रही है।
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यह सीपीआई सीरीज शुरू होने के बाद का सबसे निचला स्तर है। खाद्य वस्तुओं, विशेषकर दालों और सब्जियों की कीमतों में स्थिरता ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई है।
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 की 5 बड़ी बातें:
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निवेश और खपत: निजी निवेश (Private Investment) में सुधार हुआ है और घरेलू खपत (Consumption) जीडीपी का 61.5% हिस्सा बनी हुई है।
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शहरीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर: भारत आधिकारिक आंकड़ों से कहीं अधिक ‘शहरी’ हो चुका है। देश के 24 शहरों में 1000 किमी से अधिक का मेट्रो नेटवर्क फैला है।
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एग्रीकल्चर (कृषि): कृषि क्षेत्र को ‘विकसित भारत’ का केंद्र माना गया है। बागवानी उत्पादन अब अनाज उत्पादन से आगे निकल गया है।
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रोजगार और कौशल: नवंबर 2025 में बेरोजगारी दर गिरकर 4.7% पर आ गई है। कौशल विकास योजनाओं से युवाओं को जोड़ा जा रहा है।
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नया ‘मोटापा टैक्स’? सर्वे में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और अनहेल्दी डाइट पर टैक्स लगाने का सुझाव दिया गया है, ताकि देश में बढ़ते मोटापे और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को नियंत्रित किया जा सके।
निष्कर्ष: बजट की दिशा
यह सर्वेक्षण स्पष्ट करता है कि सरकार का ध्यान अब ‘वित्तीय स्थिरता’ के साथ-साथ ‘रणनीतिक आत्मनिर्भरता’ पर है। 1 फरवरी को वित्त मंत्री जब बजट पेश करेंगी, तो उसमें मध्यम वर्ग के लिए टैक्स राहत और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च की उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं।

















