जालंधर में किसानों का हल्लाबोल: नेशनल हाईवे जाम से बढ़ा सियासी पारा, आम जनता बेहाल

0
7

जालंधर: पंजाब के जालंधर में अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे किसानों ने नेशनल हाईवे को पूरी तरह जाम कर दिया है। इस विरोध प्रदर्शन ने न केवल शहर की रफ्तार रोक दी है, बल्कि राज्य का सियासी तापमान भी बढ़ा दिया है। जालंधर-दिल्ली नेशनल हाईवे पर धरने के कारण यातायात व्यवस्था चरमरा गई है और प्रशासन के हाथ-पांव फूल रहे हैं।

क्यों भड़का है किसानों का गुस्सा?

प्रदर्शनकारी किसान संगठनों का कहना है कि सरकार उनकी जायज मांगों को अनसुना कर रही है। किसानों की मुख्य चिंताओं में शामिल हैं:

  • फसलों का मुआवजा: खराब हुई फसलों के लंबित मुआवजे की मांग।

  • गन्ना भुगतान: शुगर मिलों की तरफ बकाया राशि को तुरंत जारी करने का दबाव।

  • सरकारी वादे: किसानों का आरोप है कि प्रशासन ने पहले भी आश्वासन दिए थे, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं बदला।


ग्राउंड रिपोर्ट: जनता की मुश्किलें और प्रशासनिक हलचल

हाईवे जाम होने के कारण स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई है:

  1. ट्रैफिक का बुरा हाल: जालंधर से लुधियाना और अमृतसर जाने वाला ट्रैफिक बुरी तरह प्रभावित है। लंबी कतारों में फंसे मुसाफिरों और एम्बुलेंसों को भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।

  2. भारी पुलिस बल तैनात: स्थिति को संभालने के लिए जालंधर प्रशासन ने भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया है। आला अधिकारी किसानों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन किसान ‘आर-पार’ की लड़ाई के मूड में हैं।

  3. सियासी घेराबंदी: इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने पंजाब सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। आरोप लगाया जा रहा है कि सरकार की विफलता के कारण बार-बार किसानों को सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।


ताजा अपडेट: क्या है वर्तमान स्थिति?

श्रेणी स्थिति
जाम का स्थान धनोवाली/नेशनल हाईवे (जालंधर)
मुख्य मांग मुआवजा और बकाया भुगतान
प्रशासनिक कदम रूट डायवर्जन और बातचीत की कोशिश
जनता पर असर हजारों वाहन फंसे, वैकल्पिक रास्तों पर भी भारी भीड़

विशेषज्ञों की राय: क्या निकलेगा समाधान?

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जालंधर का यह प्रदर्शन सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। यदि जल्द ही मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आंदोलन राज्यव्यापी रूप ले सकता है। किसानों का साफ कहना है कि जब तक मुख्यमंत्री या संबंधित अधिकारी लिखित आश्वासन नहीं देते, वे हाईवे से नहीं हटेंगे।

“हमें शौक नहीं है सड़कों पर बैठने का, लेकिन जब सरकार गूंगी और बहरी हो जाए, तो हमें अपनी आवाज सुनाने के लिए चक्का जाम करना ही पड़ता है।”प्रदर्शनकारी किसान नेता


सावधान: वैकल्पिक रास्तों का करें प्रयोग

अगर आप जालंधर की ओर यात्रा कर रहे हैं, तो नेशनल हाईवे के बजाय लिंक रोड्स या वैकल्पिक रास्तों का चुनाव करें। प्रशासन द्वारा जारी की गई नई ट्रैफिक एडवायजरी का पालन करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here