दिल्ली-NCR में प्रदूषण का तांडव: 350 के पार पहुंचा AQI,

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दिल्ली-NCR में प्रदूषण का तांडव: 350 के पार पहुंचा AQI,

नई दिल्ली | 24 दिसंबर, 2025

राजधानी दिल्ली और उससे सटे एनसीआर (NCR) के इलाकों में प्रदूषण का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। आज सुबह दिल्ली की हवा एक बार फिर ‘बेहद खराब’ (Very Poor) श्रेणी में दर्ज की गई, जिससे पूरी राजधानी गैस चैंबर में तब्दील होती नजर आ रही है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) आज सुबह 350 के पार रहा, जबकि कई इलाकों में यह 400 के करीब यानी ‘गंभीर’ श्रेणी को छू रहा है।

आनंद विहार और ओखला में स्थिति चिंताजनक

प्रदूषण के हॉटस्पॉट माने जाने वाले आनंद विहार में सुबह AQI 384 दर्ज किया गया, वहीं ओखला फेज-2 में यह 374 के स्तर पर रहा। इन इलाकों में सुबह के समय जहरीली धुंध (Smog) की चादर इतनी घनी थी कि विजिबिलिटी (दृश्यता) घटकर 50 मीटर से भी कम रह गई। सड़क पर वाहन चलाने वाले लोगों को हेडलाइट्स का सहारा लेना पड़ा और पैदल चलने वालों को आंखों में जलन और सांस लेने में भारीपन की शिकायत हुई।

अन्य प्रमुख इलाकों का हाल (AQI डेटा)

इलाका AQI स्तर श्रेणी
मुंडका 378 बेहद खराब
रोहिणी 367 बेहद खराब
नोएडा (सेक्टर-62) 342 बेहद खराब
गाजियाबाद (लोन) 355 बेहद खराब
गुरुग्राम 312 बेहद खराब

क्यों नहीं सुधर रहे हालात?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, हवा की धीमी गति और गिरते तापमान के कारण प्रदूषक कण (PM2.5 और PM10) सतह के करीब ही जमा हो गए हैं। स्थानीय कारणों के अलावा, परिवहन क्षेत्र का योगदान लगभग 17% दर्ज किया गया है। इसके अलावा, दिल्ली की कटोरेनुमा भौगोलिक स्थिति भी प्रदूषकों को बाहर नहीं निकलने दे रही है।

स्वास्थ्य पर प्रभाव और डॉक्टरों की सलाह

प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए दिल्ली के अस्पतालों में सांस के मरीजों की संख्या में 40-50% का इजाफा हुआ है। विशेषज्ञों ने बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को सुबह और शाम की सैर (Morning Walk) से बचने की सलाह दी है।

“दिल्ली की हवा इस समय फेफड़ों के लिए जहर के समान है। बिना मास्क के बाहर निकलना सीधे तौर पर बीमारियों को बुलावा देना है।” — स्वास्थ्य विशेषज्ञ

बचाव के उपाय:

  • घर से बाहर निकलते समय N95 मास्क का उपयोग अनिवार्य रूप से करें।

  • घर के अंदर हवा को साफ रखने के लिए एयर प्यूरीफायर और इनडोर प्लांट्स का सहारा लें।

  • जितना संभव हो, सार्वजनिक वाहनों (मेट्रो या बस) का उपयोग करें ताकि निजी वाहनों का प्रदूषण कम हो सके।

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