जलन्धर | 24 जनवरी, 2026
भारत ने कल 23 जनवरी को ‘पराक्रम दिवस’ के अवसर पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती पूरे उत्साह के साथ मनाई। इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में आयोजित कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया। पीएम मोदी के संबोधन का मुख्य केंद्र भारत की बढ़ती सैन्य ताकत और रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भरता’ रहा।
रक्षा निर्यात में भारत की ऐतिहासिक छलांग
प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित करते हुए एक गौरवशाली आंकड़े की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत का रक्षा निर्यात (Defence Exports) ₹23,000 करोड़ के आंकड़े को पार कर चुका है। एक समय था जब भारत केवल विदेशी हथियारों के आयात पर निर्भर रहता था, लेकिन आज दुनिया भारत में बनी ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश मिसाइल सिस्टम और तेजस जैसे लड़ाकू विमानों की मांग कर रही है। पीएम मोदी ने कहा, “आज का भारत शक्ति बढ़ाना भी जानता है, शक्ति संभालना भी जानता है और उसका सही इस्तेमाल करना भी जानता है।”
‘ऑपरेशन सिंदूर’ और आधुनिक सैन्य शक्ति
अपने भाषण में पीएम ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का भारत अब डरता नहीं, बल्कि घर में घुसकर जवाब देना जानता है। रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीकों और ड्रोन वॉरफेयर में भारत की बढ़ती पकड़ ने इसे एक वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बना दिया है।
नेताजी का विजन और विकसित भारत @2047
नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि नेताजी ने हमेशा एक शक्तिशाली और स्वतंत्र भारत का सपना देखा था। पूर्ववर्ती सरकारों पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि दशकों तक देश के महान सपूतों के बलिदान को भुलाने की कोशिश की गई, लेकिन वर्तमान सरकार नेताजी के आदर्शों को ‘विकसित भारत’ के संकल्प की नींव बना रही है।
निष्कर्ष
रक्षा उत्पादन में ₹1.54 लाख करोड़ का रिकॉर्ड स्तर और ₹23,000 करोड़ से अधिक का निर्यात यह साबित करता है कि भारत अब केवल एक बाजार नहीं, बल्कि दुनिया के लिए एक बड़ा सप्लायर बन चुका है। पराक्रम दिवस की यह प्रेरणा 140 करोड़ देशवासियों को आत्मनिर्भरता के मार्ग पर आगे बढ़ने की नई ऊर्जा दे रही है।


















