फर्जी वीडियो मामले में कपिल मिश्रा को बड़ा झटका: जालंधर कोर्ट ने ‘डॉक्टर्ड’ वीडियो हटाने का दिया आदेश

0
6
फर्जी वीडियो मामले में कपिल मिश्रा को बड़ा झटका: जालंधर कोर्ट ने 'डॉक्टर्ड' वीडियो हटाने का दिया आदेश

जालंधर की एक स्थानीय अदालत ने दिल्ली के मंत्री और भाजपा नेता कपिल मिश्रा द्वारा साझा किए गए एक कथित फर्जी वीडियो मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस वीडियो को ‘डॉक्टर्ड’ (छेड़छाड़ किया हुआ) करार देते हुए सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को इसे तुरंत हटाने का निर्देश दिया है। इस फैसले को आम आदमी पार्टी (AAP) की एक बड़ी कानूनी जीत के रूप में देखा जा रहा है।


क्या है पूरा मामला?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब कपिल मिश्रा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट (X) पर एक वीडियो साझा किया था। इस वीडियो में दावा किया गया था कि दिल्ली की वरिष्ठ नेता आतिशी ने दिल्ली विधानसभा में सिख गुरुओं, विशेष रूप से श्री गुरु तेघ बहादुर जी के बारे में आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया है। वीडियो के वायरल होते ही पंजाब और दिल्ली की राजनीति में उबाल आ गया था और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप लगने लगे थे।

फॉरेंसिक रिपोर्ट में हुआ खुलासा

जालंधर पुलिस की साइबर क्राइम सेल ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर वीडियो को फॉरेंसिक जांच के लिए मोहाली स्थित स्टेट फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजा था। फॉरेंसिक रिपोर्ट के अनुसार:

  • वीडियो के साथ डिजिटल रूप से छेड़छाड़ की गई थी।

  • वीडियो में जो विवादित शब्द (जैसे ‘गुरु’) कैप्शन के माध्यम से दिखाए गए थे, वे मूल ऑडियो में मौजूद ही नहीं थे।

  • रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि आतिशी के मूल भाषण को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया था ताकि सांप्रदायिक तनाव पैदा किया जा सके।

कोर्ट का सख्त रुख और निर्देश

अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) की अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस तरह के भ्रामक कंटेंट से सार्वजनिक व्यवस्था और धार्मिक सद्भाव बिगड़ सकता है। अदालत ने आईटी नियमों का हवाला देते हुए निम्नलिखित आदेश दिए:

  1. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (X, Facebook, Instagram, Telegram) को निर्देश दिया कि वे इस वीडियो और इससे जुड़े सभी लिंक को 24 घंटे के भीतर हटा दें।

  2. भविष्य में भी इस वीडियो के किसी भी ‘मिरर वर्जन’ या दोबारा अपलोड किए गए कंटेंट को ब्लॉक किया जाए।

  3. साइबर सेल को इस मामले में कड़ी निगरानी रखने के आदेश दिए गए।

निष्कर्ष

जालंधर कोर्ट के इस आदेश ने स्पष्ट कर दिया है कि तकनीक का दुरुपयोग कर फैलाई जाने वाली फर्जी खबरें (Fake News) न केवल दंडनीय हैं, बल्कि न्यायपालिका ऐसी गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रही है। विपक्षी दलों ने इस फैसले के बाद कपिल मिश्रा से माफी की मांग की है, जबकि भाजपा की ओर से इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया जा रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here