आज, 6 नवंबर 2025, को बिहार विधानसभा चुनाव का पहला और सबसे बड़ा चरण शुरू हो गया है। राज्य की 243 सीटों में से 121 महत्वपूर्ण सीटों पर सुबह से ही मतदान जारी है। यह चरण न केवल कई प्रमुख राजनीतिक दिग्गजों का भविष्य तय करेगा, बल्कि यह भी स्पष्ट करेगा कि मतदाता इस बार NDA के ‘सुशासन’ या महागठबंधन के ‘रोजगार’ के वादे पर भरोसा कर रहे हैं।
मुख्य मुकाबले: कौन-कौन हैं मैदान में?
पहले चरण में कई हाई-प्रोफाइल सीटें शामिल हैं जहाँ सीधा और कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है।
- राघोपुर: यह सीट तेजस्वी यादव (RJD) का गढ़ है और महागठबंधन के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है। यहाँ उनकी टक्कर NDA के मजबूत उम्मीदवार से है।
- तारापुर: भाजपा के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी भी इसी चरण में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
- लखीसराय: यहां से भाजपा के कद्दावर नेता और मौजूदा विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा मैदान में हैं, जिनके सामने महागठबंधन ने एक युवा उम्मीदवार को उतारा है।
- अली नगर: लोक गायिका और भाजपा की उम्मीदवार मैथिली ठाकुर पहली बार चुनावी मैदान में हैं, जिससे यह सीट काफी चर्चा में है।
इन सीटों पर हो रहा बिहार चुनाव 2025 का मतदान सीधे तौर पर यह दिखाएगा कि क्या मौजूदा सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) का लाभ महागठबंधन उठा पाएगा, या फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में NDA अपनी पकड़ बनाए रखेगा।
चुनावी मुद्दे: युवाओं का रुझान किस ओर?
इस बार के बिहार विधानसभा चुनाव में मुद्दे बेहद स्पष्ट हैं। मुख्य रूप से दो बड़े विषयों पर बहस केंद्रित है:
- रोजगार और पलायन (Unemployment & Migration): बिहार का युवा, जो राज्य की एक बड़ी आबादी है, सरकारी नौकरियों और रोजगार के अवसरों की तलाश में है। महागठबंधन ने 10 लाख सरकारी नौकरियों का वादा किया है, जिसने युवाओं के बीच एक बड़ी उम्मीद जगाई है।
- विकास और सुशासन: NDA अपने कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों (सड़कें, पुल, बिजली) और राज्य में बेहतर कानून व्यवस्था स्थापित करने के दावों पर ज़ोर दे रहा है।
जातिगत समीकरण अपनी जगह कायम हैं, लेकिन इस बार युवाओं का वोट एक निर्णायक फैक्टर साबित हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जो गठबंधन युवाओं को अपने पक्ष में करने में सफल होगा, बिहार चुनाव परिणाम 2025 में उसकी जीत की संभावना उतनी ही अधिक होगी।
दोपहर तक का मतदान प्रतिशत
पहले चरण के मतदान में दोपहर 12 बजे तक लगभग 25% मतदान दर्ज किया गया है। चुनाव आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे COVID-19 सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए बड़ी संख्या में अपने मताधिकार का प्रयोग करें। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित किया जा सके।
क्या कहते हैं संकेत?
यह चरण राज्य की आधी से ज़्यादा सीटों पर मतदान पूरा कर देगा। राजनीतिक पंडितों के लिए यह चरण प्रारंभिक संकेत देगा कि हवा किस ओर बह रही है। पहले चरण का उच्च मतदान प्रतिशत अक्सर बदलाव का संकेत देता है, जबकि कम मतदान मौजूदा सरकार के पक्ष में जा सकता है। अब सभी की निगाहें 14 नवंबर 2025 पर टिकी हैं, जब बिहार चुनाव परिणाम घोषित होंगे।
















