भारत-रूस शिखर वार्ता: रक्षा सौदों और रणनीतिक साझेदारी पर पुतिन-मोदी की ऐतिहासिक मुलाकात
मुख्य बातें:
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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा।
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रक्षा, ऊर्जा और न्यूक्लियर सहयोग पर महत्वपूर्ण समझौते।
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प्रधानमंत्री मोदी ने भेंट की रूसी भाषा में भगवद्गीता।
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S-400 मिसाइल प्रणाली की आपूर्ति और भविष्य की साझेदारी पर ज़ोर।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा दोनों देशों के बीच दशकों पुरानी रणनीतिक साझेदारी को एक नई ऊंचाई प्रदान करने वाला साबित हुआ है। दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में उनका औपचारिक स्वागत किया गया, जहाँ से द्विपक्षीय शिखर वार्ता की शुरुआत हुई। यह दौरा न सिर्फ भारत और रूस के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भू-राजनीतिक परिदृश्य में भी इसके गहरे मायने हैं।
रक्षा सहयोग और S-400 की आपूर्ति
शिखर वार्ता का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा रक्षा सौदों पर केंद्रित रहा। रूस लंबे समय से भारत का सबसे बड़ा और भरोसेमंद रक्षा आपूर्तिकर्ता रहा है। इस बैठक में दोनों नेताओं ने S-400 ‘ट्रायम्फ’ एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी की प्रगति की समीक्षा की। इस अत्याधुनिक प्रणाली का भारत में आना देश की हवाई सुरक्षा को अभूतपूर्व मजबूती देगा।
इसके अलावा, मेक इन इंडिया पहल के तहत भारत में रूसी सैन्य उपकरणों के संयुक्त उत्पादन (Co-production) और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) पर भी गहन चर्चा हुई। इससे भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा, जो कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के लिए अहम है।
ऊर्जा और न्यूक्लियर सहयोग में प्रगति
रक्षा के बाद, ऊर्जा क्षेत्र भारत-रूस साझेदारी का दूसरा स्तंभ है। दोनों देशों ने न्यूक्लियर रिएक्टर के निर्माण और सिविल न्यूक्लियर सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। तमिलनाडु में कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट (KKNPP) में रूसी तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, और भविष्य की रिएक्टर इकाइयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
तेल और गैस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने, विशेष रूप से रूस के सुदूर पूर्व (Far East) में भारतीय कंपनियों की भागीदारी को बढ़ाने पर सहमति बनी है। यह न सिर्फ भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक संबंधों को भी मजबूत करेगा।
सांस्कृतिक आदान-प्रदान और मोदी की भेंट
बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को रूसी भाषा में लिखी भगवद्गीता की एक विशेष प्रति भेंट की। यह भेंट दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जुड़ाव का प्रतीक है। यह कदम दिखाता है कि दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों को सिर्फ व्यापार और रक्षा तक सीमित न रखकर, जन-जन के स्तर पर भी मजबूत करना चाहते हैं।
निष्कर्ष
पुतिन का यह दौरा कई मायनों में सफल रहा है। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय स्थिरता, अफगानिस्तान की स्थिति और आतंकवाद जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा की। यह शिखर वार्ता इस बात की पुष्टि करती है कि भारत और रूस का रिश्ता समय की कसौटी पर खरा उतरा है और यह आपसी विश्वास, समान हितों और रणनीतिक स्वायत्तता के सिद्धांतों पर आधारित है। यह साझेदारी आने वाले वर्षों में भी वैश्विक शांति और सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

















