चंडीगढ़ मेयर चुनाव: सुप्रीम कोर्ट ने की सुनवाई

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चंडीगढ़ मेयर चुनाव मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रिटर्निंग अधिकारी को कड़ी फटकार लगाई। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि यह स्पष्ट है कि रिटर्निंग अधिकारी ने मतपत्रों को नष्ट किया है। यह लोकतंत्र का मजाक है। यह जनतंत्र की हत्या है। पूरे मामले से हम हैरान हैं। इस अधिकारी पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से मतपत्र, वीडियोग्राफी और अन्य सामग्री समेत चुनाव प्रक्रिया के पूरे रिकॉर्ड को संरक्षित करने का आदेश दिया। वहीं अगली सुनवाई तक चंडीगढ़ निगम की आगामी बैठक को टालने का निर्देश भी दिया।

30 जनवरी को हाईकोर्ट के आदेश पर चंडीगढ़ मेयर चुनाव हुआ था। इसमें भाजपा प्रत्याशी मनोज सोनकर ने चार मतों से जीत दर्ज की थी। भाजपा के पास कुल 14 पार्षद थे। वहीं एक मत सांसद किरण खेर का था। भाजपा प्रत्याशी को कुल 16 वोट मिले थे। वहीं कांग्रेस-आप प्रत्याशी को 12 मत मिले थे। जबकि गठबंधन के पास कुल 20 मत थे। चुनाव के दौरान आठ मतों को अमान्य करार दिया गया था। इस वजह से मेयर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी। हाईकोर्ट के आदेश पर चुनाव प्रक्रिया की पूरी वीडियोग्राफी की गई थी। कुछ समय बाद पीठासीन अधिकारी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसमें वह कथित रूप से मतपत्रों पर पेन चलाते दिख रहे हैं। इसके बाद आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने भाजपा पर चुनाव में धांधली का आरोप लगाया। मामला पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा। मगर हाईकोर्ट ने कोई राहत नहीं दी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

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