पतंजलि भ्रामक विज्ञापन केस में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जहां कोर्ट ने दूसरी बार माफीनामा को खारिज कर दिया है और कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई। न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने पतंजलि के खिलाफ कड़ा प्रहार किया, कहते हुए कि उनकी हरकतें शीर्ष अदालत के आदेशों का “जानबूझकर और बार-बार उल्लंघन” करने जैसी थीं।

शीर्ष अदालत ने पतंजलि आयुर्वेद के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने को लेकर उत्तराखंड राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण के प्रति भी कड़ी नाराजगी जताई। बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने अपने औषधीय उत्पादों के असर के बड़े-बड़े दावे करने वाले विज्ञापनों के लिए ‘बिना शर्त माफी’ मांगी है।
उच्चतम न्यायालय में दाखिल दो अलग-अलग हलफनामों में रामदेव और बालकृष्ण ने शीर्ष अदालत के पिछले साल 21 नवंबर के आदेश में दर्ज ‘बयान के उल्लंघन’ के लिए बिना शर्त माफी मांगी है।
इससे पहले इसी महीने 2 अप्रैल को हुई सुनवाई में पंतजलि की तरफ से माफीनामा जमा किया गया था, जिसे न्यायिक बेंच ने सिर्फ खानापूर्ति के लिए माना।सुप्रीम कोर्ट ने रामदेव-बालकृष्ण का दूसरा माफीनामा भी खारिज किया- कार्रवाई का सामना करने के लिए कहा

















