छठ पुजा को बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है, विशेषकर बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और नेपाल के कुछ हिस्सों में। यह व्रत सूर्य देव और छठी मैया की पूजा के लिए समर्पित है। यहाँ हम बताएँगे कि छठ व्रत कैसे करें, पूजा-विधि क्या है और कुछ महत्वपूर्ण टिप्स क्या जानना ज़रूरी है।
छठ पूजा की प्रमुख विधि
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व्रत संकल्प: नहाय-खाय के दिन व्रती स्नान कर, नए वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लेती हैं।
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सात्विक भोजन: इस दिन का भोजन सरल और पवित्र होता है — जैसे चावल-दाल-सब्जी, बिना रसोई के तेल-मसाले से।
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खरना दिन: व्रती निर्जला व्रत रखती हैं, सूर्यास्त के बाद गुड़-चावल की खीर-रोटी का भोग लगाती हैं और फिर उपवास जारी रखती हैं।
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संध्या अर्घ्य: तीसरे दिन व्रती शाम को घाट या जलाशय के किनारे जाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देती हैं। अर्घ्य की थाली में ठेकुआ, केला, नारियल, फल-मूल आदि होते हैं।
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उषा अर्घ्य + पारण: सुबह सूर्योदय के समय अर्घ्य दिया जाता है और उसके बाद व्रत का पारण होता है। इस प्रकार चार-दिन का व्रत पूरा होता है।
छठी मइया को अर्घ्य देने की प्रक्रिया
छठी मैया को अर्घ्य देने के समय कुछ बातें विशेष ध्यान देने योग्य हैं:
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स्थान: नदी, तालाब, पोखर या यदि संभव न हो तो अपने घर की छत पर जल का पात्र तैयार करें।
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समय: संध्या अर्घ्य के समय सूर्यास्त के बाद और उषा अर्घ्य सुबह सूर्योदय से पहले। इस वर्ष की तिथियाँ 27 अक्टूबर (संध्या) और 28 अक्टूबर (उषा) हैं।
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प्रसाद: ठेकुआ, गन्ना, फल-सब्जी-नारियल आदि चढ़ाना एवं ग्रहण करना। ये वस्तुएँ श्रद्धा व परंपरा दोनों का प्रतीक हैं।
महत्वपूर्ण टिप्स
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पूजा के दिन साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें — शरीर व मन दोनों को शुद्ध रखें।
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सुबह-शाम घाट पहुँचने की योजना पहले बना लें — स्थान व समय का फोर्बेस्ट समीकरण आपके व्रत को सजग बनाएगा।
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परिवार व मित्रों को भी शामिल करें — छठ पूजा सामाजिक उत्सव के रूप में भी माना जाता है।
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मोबाइल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक विकर्षण को न्यूनतम रखें, पूर्ण समर्पण भाव से पूजा करें।
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यदि आप पहली बार व्रत कर रहे हों, तो अनुभवी व्यक्ति की सलाह लें।
निष्कर्ष
छठ पूजा सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, यह भक्त-भाव, संयम, आत्मशुद्धि और परिवार-समाज में एकता का प्रतीक है। यदि आप “छठ पूजा की विधि”, “छठ व्रत कैसे करें” जैसे प्रश्नों के साथ तैयारी कर रहे हैं, तो ऊपर दिए गए मार्गदर्शक चरण आपके लिए उपयोगी साबित होंगे। इस वर्ष छठ व्रत को पूरी श्रद्धा और नियम के साथ निभाएं, और छठी मैया व सूर्य देव से अपने जीवन में समृद्धि तथा आशीर्वाद प्राप्त करें।


















