नाभा/ब्यास: पंजाब की राजनीति में उस वक्त एक नया मोड़ आ गया जब डेरा राधा स्वामी सत्संग ब्यास के प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों ने नाभा जेल में बंद शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद बाबा जी द्वारा दिए गए संक्षिप्त लेकिन गहरे बयान ने राज्य के राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।
मुलाकात का मुख्य उद्देश्य: क्या यह केवल ‘हाल-चाल’ था?
डेरा प्रमुख का जेल जाकर किसी राजनीतिक नेता से मिलना एक बड़ी घटना मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों ने मजीठिया की सेहत और उनके मनोबल के बारे में जानकारी ली।
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बाबा जी का बयान: मुलाकात के बाद सामने आए संकेतों में बाबा जी ने मजीठिया की स्थिति पर चर्चा की और धैर्य बनाए रखने का संदेश दिया। हालांकि डेरा ब्यास सीधे तौर पर राजनीति में दखल नहीं देता, लेकिन इस मुलाकात को मजीठिया परिवार के साथ उनके पुराने और करीबी रिश्तों से जोड़कर देखा जा रहा है।
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जेल के अंदर की स्थिति: बाबा जी ने मजीठिया से मुलाकात के दौरान उनकी सेहत के बारे में चिंता व्यक्त की और उन्हें आध्यात्मिक रूप से मजबूत रहने की प्रेरणा दी।
पंजाब की सियासत पर क्या होगा असर?
पंजाब की राजनीति में डेरा ब्यास का एक बहुत बड़ा प्रभाव है। लाखों की संख्या में अनुयायी होने के कारण, डेरा प्रमुख की किसी भी गतिविधि को राजनीतिक चश्मे से देखा जाना स्वाभाविक है।
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मजीठिया के लिए नैतिक समर्थन: सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने की खबरों के बीच डेरा प्रमुख की यह मुलाकात मजीठिया के लिए एक बड़े ‘मोरल बूस्ट’ (नैतिक समर्थन) के रूप में देखी जा रही है।
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अकाली दल को मजबूती: इस मुलाकात से अकाली दल के कैडर में यह संदेश गया है कि बड़े धार्मिक संस्थान अभी भी उनके नेताओं के साथ खड़े हैं।
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विरोधी खेमे में बेचैनी: इस मुलाकात ने विपक्षी दलों (AAP और कांग्रेस) के बीच हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि डेरा ब्यास के अनुयायियों का वोट बैंक पंजाब की कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है।
अहम जानकारी: मुलाकात और बयान की मुख्य बातें
| विवरण | जानकारी |
| स्थान | नाभा जेल, पंजाब |
| प्रमुख शख्सियत | बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों (डेरा ब्यास) और बिक्रम मजीठिया |
| मुख्य संदेश | धैर्य और आध्यात्मिक शक्ति बनाए रखना |
निष्कर्ष
हालांकि डेरा ब्यास हमेशा राजनीति से दूरी बनाए रखने का दावा करता है, लेकिन बिक्रम मजीठिया जैसे कद्दावर नेता से जेल में जाकर मिलना यह दर्शाता है कि यह संबंध केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि पारिवारिक और व्यक्तिगत भी हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मुलाकात का पंजाब के आगामी चुनावों या राजनीतिक समीकरणों पर क्या प्रभाव पड़ता है।
“सच्चाई और धैर्य की परीक्षा कठिन होती है, लेकिन अंततः जीत सत्य की ही होती है।” — मुलाकात के बाद उभरा मुख्य संदेश
















