उत्तर भारत में मौसम का अलर्ट: 18 से 20 मार्च तक भारी बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी, पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) का दिखेगा असर

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उत्तर भारत में मौसम का अलर्ट: 18 से 20 मार्च तक भारी बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी

सावधान! उत्तर भारत में करवट लेगा मौसम: ओलावृष्टि और गरज के साथ बारिश का अलर्ट

नई दिल्ली: मार्च के महीने में जहां गर्मी ने अपनी दस्तक देनी शुरू कर दी थी, वहीं अब मौसम विभाग (IMD) ने एक बार फिर उत्तर भारत के राज्यों के लिए चेतावनी जारी की है। एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के हिमालयी क्षेत्र में पहुंचने के कारण 18 से 20 मार्च के बीच मैदानी और पहाड़ी इलाकों में मौसम पूरी तरह बदलने वाला है।

इन राज्यों में दिखेगा सबसे ज्यादा असर

मौसम विभाग के अनुसार, अगले 48 घंटों में दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आसमान में काले बादल छा जाएंगे। 18 मार्च की शाम से लेकर 20 मार्च तक इन क्षेत्रों में तेज हवाओं (30-40 किमी/घंटा) के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की प्रबल संभावना है।

ओलावृष्टि (Hailstorm) की चेतावनी: किसानों की बढ़ी चिंता

इस बार केवल बारिश ही नहीं, बल्कि पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के कुछ हिस्सों में ओलावृष्टि की भी आशंका जताई गई है। यह समय रबी की फसलों (विशेषकर गेहूं और सरसों) की कटाई और पकने का है। ऐसे में अचानक ओले गिरने से खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंच सकता है, जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं।

पहाड़ों पर बर्फबारी और ठंड की वापसी

जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊपरी इलाकों में भारी बर्फबारी और निचले इलाकों में मूसलाधार बारिश का अनुमान है। इसके चलते मैदानी इलाकों में तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे सुबह और रात के वक्त एक बार फिर हल्की ठंड का अहसास होगा।

प्रशासन की सलाह और सावधानियां

  • यात्री: पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा करने वाले लोग लैंडस्लाइड (भूस्खलन) की संभावना को देखते हुए सतर्क रहें।

  • किसान: मौसम विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि यदि फसल कट चुकी है, तो उसे सुरक्षित स्थान पर रखें और सिंचाई का काम फिलहाल रोक दें।

  • आम जनता: गरज-चमक के दौरान बिजली के खंभों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें।

निष्कर्ष

मार्च के मध्य में होने वाली यह बारिश जहां प्रदूषण से राहत दिला सकती है, वहीं कृषि क्षेत्र के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनकर आई है। 21 मार्च के बाद ही आसमान साफ होने और धूप खिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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