जालंधर, पंजाब: पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार अब एक बड़े घोटाले के आरोपों के घेरे में है। विपक्ष ने राज्य के जल संसाधन मंत्री ब्रिंदर गोयल के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने ड्रेनेज की सफाई पर 250 करोड़ रुपये खर्च करने की बात कही थी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रताप सिंह बाजवा, सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, उप-नेता प्रतिपक्ष अरुणा चौधरी और विधायक ब्रिंदरमीत सिंह पाहड़ा ने संयुक्त रूप से मान सरकार पर निशाना साधा है। उनका आरोप है कि जमीन पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है – नाले अभी भी जाम हैं, कई गाँव जलमग्न हैं और लोग भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। विपक्ष ने इस 250 करोड़ रुपये के खर्च की गहन जांच की मांग की है।
खोखले निकले मंत्री ब्रिंदर गोयल के दावे
जल संसाधन मंत्री ब्रिंदर गोयल ने हाल ही में दावा किया था कि राज्य सरकार ने मानसून से पहले ड्रेनेज सिस्टम की सफाई पर 250 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। उनका तर्क था कि इस बड़े खर्च से मानसून के दौरान पानी के जमाव और बाढ़ जैसी स्थितियों को रोका जा सकेगा। हालांकि, कांग्रेस नेताओं ने इन दावों को पूरी तरह से ‘खोखला’ बताया है। प्रताप सिंह बाजवा ने कहा, “मंत्री जी के दावे सिर्फ कागजों पर हैं। वास्तविकता यह है कि पंजाब के ग्रामीण इलाकों में, विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्रों में, नाले अभी भी गाद और कचरे से भरे पड़े हैं। थोड़ी सी बारिश में ही सड़कें और खेत जलमग्न हो जाते हैं, जिससे किसानों और आम जनता को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।”
ग्राउंड रियलिटी: जाम नाले और जलमग्न गाँव
विपक्षी नेताओं ने कई ऐसे उदाहरण पेश किए जहां ड्रेनेज सफाई के नाम पर कोई काम नहीं हुआ है। सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा, “हमने खुद कई इलाकों का दौरा किया है। वहाँ के लोगों ने बताया कि ड्रेनेज की सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई है या फिर कोई काम हुआ ही नहीं है। कई गाँवों में तो मानसून की शुरुआत से पहले ही पानी भर गया है क्योंकि निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। 250 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद, अगर यही स्थिति है, तो यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि कहीं न कहीं बड़ा भ्रष्टाचार हुआ है।”
उप-नेता प्रतिपक्ष अरुणा चौधरी ने महिला किसानों और ग्रामीण परिवारों की दुर्दशा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “जलभराव के कारण किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं। घरों में पानी घुसने से लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बच्चों को स्कूल जाने में दिक्कत हो रही है और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। यह सिर्फ पैसों का दुरुपयोग नहीं, बल्कि जनता के जीवन से खिलवाड़ है।” विधायक ब्रिंदरमीत सिंह पाहड़ा ने भी सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब जनता परेशान है और बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, तो करोड़ों रुपये आखिर कहाँ गए?
250 करोड़ रुपये कहाँ गए? विपक्ष ने उठाई जांच की मांग
कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने और 250 करोड़ रुपये के खर्च का हिसाब मांगने की अपील की है। प्रताप सिंह बाजवा ने कहा, “हम मांग करते हैं कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। यह पता लगाया जाना चाहिए कि वास्तव में 250 करोड़ रुपये कहाँ खर्च हुए और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। दोषी अधिकारियों और मंत्रियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।”
यह आरोप ऐसे समय में लगे हैं जब पंजाब पहले से ही वित्तीय संकट और अन्य प्रशासनिक चुनौतियों से जूझ रहा है। विपक्ष का यह हमला आम आदमी पार्टी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है, खासकर तब जब राज्य में मानसून अपने पूरे शबाब पर है और ड्रेनेज सिस्टम की कार्यप्रणाली सीधे तौर पर जनता के जीवन को प्रभावित करती है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि मान सरकार इन गंभीर आरोपों का जवाब कैसे देती है और क्या वे इस कथित घोटाले की जांच के आदेश देती है। जनता अब केवल एक ही सवाल पूछ रही है: हमारे 250 करोड़ रुपये कहाँ हैं?

















