जालन्धर/(नेहा): दक्षिण एशिया में मॉनसून की बारिश एक बार फिर बड़ी तबाही लेकर आई है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में भीषण बाढ़ ने लाखों लोगों को प्रभावित किया है, वहीं भारत के हिमालयी इलाके में भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन ने दर्जनों लोगों की जान ले ली।
पाकिस्तान के पंजाब में बाढ़
आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, लगातार हो रही बारिश से 1400 से अधिक गाँव जलमग्न हो गए हैं और 10 लाख से ज़्यादा लोग अपने घर छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं। सड़कों पर पानी भर गया है, खेत बर्बाद हो गए हैं और पूरा इलाका जलप्रलय में बदल गया है।
बचाव कार्य के लिए सेना और राहत दल नावों और हेलीकॉप्टरों की मदद से फंसे लोगों को सुरक्षित निकाल रहे हैं। प्रभावित जिलों में आपातकाल की घोषणा कर दी गई है। हालांकि, राहत शिविरों में रह रहे लोगों ने खाने-पीने की चीज़ों और दवाओं की कमी की शिकायत की है। विशेषज्ञों का कहना है कि खराब ड्रेनेज सिस्टम और तेज़ शहरीकरण ने बाढ़ की स्थिति को और बिगाड़ दिया है।
भारत के हिमालय में भूस्खलन
भारत में वैष्णो देवी मंदिर के पास जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में भारी बारिश के बाद बड़ा भूस्खलन हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक़ कम से कम 36 लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई लोग घायल और लापता हैं।
भूस्खलन से कई गाड़ियाँ मलबे में दब गईं और कई घर ढह गए। मौके पर NDRF और सेना की टीमें लगातार राहत और बचाव कार्य में लगी हुई हैं। प्रशासन ने तीर्थयात्रियों से वैष्णो देवी की यात्रा कुछ दिनों के लिए टालने की अपील की है।
जलवायु परिवर्तन का असर
पाकिस्तान और भारत दोनों की ये त्रासदियाँ इस बात का सबूत हैं कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण मॉनसून पहले से ज़्यादा खतरनाक और अनियंत्रित हो गया है। अब बारिश के साथ बाढ़, भूस्खलन और प्राकृतिक आपदाएँ लगातार बढ़ती जा रही हैं।
निष्कर्ष
पंजाब की बाढ़ और हिमालयी भूस्खलन ने यह साफ़ कर दिया है कि सरकारों को आपदा प्रबंधन और मज़बूत ढांचे की सख़्त ज़रूरत है। लाखों लोग सुरक्षित जीवन की उम्मीद में हैं, जबकि प्रशासन राहत पहुँचाने की कोशिश कर रहा है।

















